डॉक्टरों और अस्पतालों के सोशल मीडिया प्रचार पर NMC की सख्ती, भ्रामक विज्ञापनों पर लगेगी रोक !

नंबर-1’, ‘बेस्ट’ और ‘गारंटीड इलाज’ जैसे दावों पर प्रतिबंध; सोशल मीडिया से लेकर AI प्रचार तक नियमों के दायरे में !

उत्तर प्रदेश : लखनऊ

10 अक्टूबर 2026 : डॉक्टरों, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के विज्ञापन एवं सोशल मीडिया प्रचार को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की नई गाइडलाइन को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। इसका उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं के प्रचार में भ्रामक दावों पर अंकुश लगाना, मरीजों के अधिकारों की रक्षा करना और चिकित्सा पेशे की गरिमा बनाए रखना है। बताई गई गाइडलाइन के अनुसार, डॉक्टरों और अस्पतालों द्वारा खुद को ‘बेस्ट’, ‘नंबर-1’, ‘टॉप’, ‘मोस्ट ट्रस्टेड’ या ‘गारंटीड इलाज’ बताकर मरीजों को आकर्षित करने जैसे भ्रामक दावों पर रोक लगाने का प्रावधान है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइट, व्हाट्सऐप, पॉडकास्ट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से किए जाने वाले प्रचार को भी नियमों के दायरे में शामिल किए जाने की बात कही गई है।

मरीजों की तस्वीरों और मेडिकल रिकॉर्ड के दुरुपयोग पर रोक:-

मरीजों की फोटो, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड, प्रशंसापत्र और इलाज के परिणामों का अनुचित व्यावसायिक प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। AI की मदद से मरीजों या उपचार से जुड़ी नकली अथवा भ्रामक सामग्री तैयार करने और बदली हुई सामग्री के जरिए इलाज के परिणामों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने पर भी रोक का प्रावधान बताया गया है।

डिस्काउंट और उपहार देकर मरीज जुटाने पर सख्ती:-

गाइडलाइन के तहत डिस्काउंट, कूपन, कैशबैक, उपहार, रेफरल भुगतान और मुफ्त चिकित्सा प्रक्रिया जैसी पेशकशों के जरिए मरीजों को आकर्षित करने पर रोक लगाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं को अनुचित व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और मरीजों को लुभाने वाली प्रचार गतिविधियों से बचाना है।

अस्पताल वेबसाइट पर दी जा सकेगी जरूरी जानकारी:-

नियमों में स्वास्थ्य जागरूकता और जनस्वास्थ्य से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी देने की अनुमति का उल्लेख है। अस्पताल अपनी वेबसाइट पर विभागों, उपलब्ध सुविधाओं, उपचार शुल्क, डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और विशेषज्ञता जैसी आवश्यक जानकारी दे सकेंगे। हालांकि, इस जानकारी की आड़ में भ्रामक दावे या अनुचित व्यावसायिक प्रचार नहीं किया जा सकेगा।

नियमों के उल्लंघन पर हो सकती है कार्रवाई:-

गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ पंजीकरण निलंबन सहित नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई और लागू कानूनों के तहत दंड का प्रावधान हो सकता है। इससे चिकित्सा संस्थानों और डॉक्टरों को अपने विज्ञापनों, सोशल मीडिया पोस्ट तथा डिजिटल प्रचार सामग्री में अधिक सावधानी बरतनी होगी।

उत्तर प्रदेश न्यूज हैड कृष्ण कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

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