पुलिस थानों में CCTV अब विकल्प नहीं, कानूनी बाध्यता: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्टों ने भी तय की जवाबदेही !

थानों, लॉकअप और पूछताछ कक्षों में कैमरे चालू रखना अनिवार्य; फुटेज सुरक्षित रखना पुलिस की जिम्मेदारी, लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही तय !

उत्तर प्रदेश : लखनऊ

8 अगस्त 2026 : पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाना अब महज प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी आदेश का हिस्सा है। Paramvir Singh Saini v. Baljit Singh, (2021) 1 SCC 184 मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के पुलिस थानों, लॉकअप, पूछताछ कक्षों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर कार्यशील CCTV कैमरे लगाने, पर्याप्त बैकअप उपलब्ध कराने तथा रिकॉर्डिंग को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे। यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत देशभर की अदालतों और प्रशासनिक तंत्र के लिए बाध्यकारी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों ने समय-समय पर CCTV व्यवस्था के अनुपालन की निगरानी करते हुए पुलिस विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय की है। कई मामलों में अदालतों ने खराब कैमरे, बंद DVR, बिजली-बैकअप की कमी और CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं कराने को गंभीरता से लिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में जताई नाराजगी:-

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। Sanu @ Rashid v. State of U.P. मामले में अदालत ने थानों में CCTV का खराब रहना गंभीर चिंता का विषय माना और आकस्मिक निरीक्षण तथा अनुपालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने संबंधित मजिस्ट्रेटों द्वारा1 पुलिस थानों के निरीक्षण तथा CCTV व्यवस्था की निगरानी पर बल दिया। साथ ही पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए। 28 जुलाई 2026 के आदेश में भी ऐसे थानों को लेकर गंभीरता दिखाई गई, जहां CCTV, जनरेटर अथवा बैकअप पावर व्यवस्था काम नहीं कर रही थी। आदेश में कार्यशील CCTV और निर्बाध बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर डाली गई।

दिल्ली हाईकोर्ट ने फुटेज सुरक्षित रखने पर दिया जोर:-

दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष भी CCTV फुटेज के संरक्षण का मुद्दा सामने आया। W.P. (CRL.) No. 3502/2023 में अदालत ने संबंधित CCTV फुटेज को तत्काल सुरक्षित रखने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट न होने देने पर विशेष जोर दिया।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूछताछ कक्षों की स्थिति पर मांगा जवाब:-

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने विभिन्न मामलों में पुलिस एवं जांच एजेंसियों से पूछताछ कक्षों में CCTV की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। खराब CCTV व्यवस्था और फुटेज संरक्षण के मामलों में अदालत ने गंभीर टिप्पणियां कीं तथा संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। मध्य प्रदेश में रिकॉर्डिंग न मिलने पर सख्त रुख, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के समक्ष Sohanlal v. State of Madhya Pradesh मामले में CCTV और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़ी अनिवार्य प्रक्रिया के पालन का मुद्दा उठा। अदालत ने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने पर नाराजगी जताई और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए।

महाराष्ट्र में खराब CCTV बदलने के निर्देश:-

बॉम्बे हाईकोर्ट ने High Court on its Own Motion, Writ Petition No. 692 of 2022 में महाराष्ट्र के पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था की निगरानी की। अदालत ने खराब कैमरों को तत्काल बदलने, रिकॉर्डिंग क्षमता सुनिश्चित करने और डेटा संरक्षण संबंधी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर जोर दिया।

गुजरात में भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन की निगरानी:-

गुजरात में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन के दौरान पुलिस थानों में CCTV लगाने के लिए समय-सीमा और बजट संबंधी निर्देश दिए गए। बाद के एक मामले में पूछताछ कक्ष में CCTV के अभाव और DVR के काम नहीं करने को लेकर अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक भावना के अनुरूप होना चाहिए।

दक्षिण भारत के राज्यों में भी अदालतों की सख्ती:-

मद्रास, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हाईकोर्टों ने भी पुलिस थानों की CCTV व्यवस्था और फुटेज संरक्षण को लेकर अलग-अलग मामलों में पुलिस विभाग से जवाब मांगा है। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में CCTV व्यवस्था के स्वतंत्र ऑडिट और फुटेज को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखने के निर्देशों पर जोर दिया गया। तेलंगाना हाईकोर्ट ने कथित हिरासत में प्रताड़ना के मामले में संबंधित पुलिस स्टेशन की CCTV फुटेज अदालत के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए। केरल हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार से पुलिस थानों में लगे CCTV कैमरों की संख्या, कार्यशीलता और हिरासत से जुड़े मामलों में फुटेज की उपलब्धता संबंधी जानकारी मांगी।

पटना और झारखंड हाईकोर्ट ने भी मांगा अनुपालन:-

पटना हाईकोर्ट के समक्ष भी CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और अदालत के सामने प्रस्तुत करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संदर्भ आया। वहीं झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में CCTV लगाने और उनके रखरखाव को लेकर राज्य सरकार से अनुपालन रिपोर्ट मांगी। जून 2026 के आदेश में DGP से पुलिस स्टेशनों में CCTV की संख्या, उनकी कार्यशीलता, डेटा स्टोरेज और रखरखाव की विस्तृत जानकारी मांगे जाने का उल्लेख है।

CCTV बना पुलिस जवाबदेही का महत्वपूर्ण माध्यम:-

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस थानों में CCTV का उद्देश्य केवल निगरानी करना नहीं, बल्कि हिरासत में मानवाधिकारों की रक्षा, पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता और विवाद की स्थिति में निष्पक्ष साक्ष्य उपलब्ध कराना भी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विभिन्न उच्च न्यायालयों के रुख से यह स्पष्ट होता है कि CCTV कैमरे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें लगातार कार्यशील रखना, पर्याप्त बिजली एवं बैकअप उपलब्ध कराना और फुटेज को सुरक्षित रखना भी पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में CCTV बंद होना, DVR खराब होना अथवा महत्वपूर्ण समय की फुटेज उपलब्ध न होना अब महज तकनीकी या प्रशासनिक कमी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परिस्थितियों के अनुसार संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।

निष्कर्ष:-

Paramvir Singh Saini v. Baljit Singh का फैसला पुलिस थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक मानक बन चुका है। देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में हुई कार्यवाहियों से यह संदेश स्पष्ट है कि पुलिस स्टेशन में लगा CCTV महज एक कैमरा नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण मूक गवाह है।

उत्तर प्रदेश न्यूज़ हैड कृष्ण कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

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