बालिगों के सहमति से विवाह की जांच करना पुलिस का काम नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट !

FIR रद्द, एसपी और थाना प्रभारी पर ₹1,000 तथा महिला के पिता पर ₹5,000 जुर्माना !

उत्तर प्रदेश : प्रयागराज

31 जुलाई 2026 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दो बालिग व्यक्तियों द्वारा अपनी इच्छा और सहमति से किए गए विवाह की जांच करना पुलिस का काम नहीं है। पुलिस का दायित्व अपराधों की जांच करना है, न कि वयस्क नागरिकों के वैवाहिक जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप करना। अदालत ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने और उसके साथ जीवन बिताने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। यह आदेश न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया। मामला महिला के पिता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा था, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 के तहत आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर विवाह के उद्देश्य से ले जाया गया। सुनवाई के दौरान दंपति की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों बालिग और शिक्षित हैं तथा उन्होंने 18 फरवरी 2026 को अपनी इच्छा से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया है। महिला स्वयं अदालत के समक्ष उपस्थित हुई और स्पष्ट रूप से कहा कि उसने अपनी मर्जी से विवाह किया है तथा वह अपने पति के साथ रहना चाहती है। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि जब दोनों पक्ष बालिग हैं और विवाह उनकी स्वतंत्र इच्छा एवं सहमति से हुआ है, तो अपहरण, प्रलोभन या बहला-फुसलाकर ले जाने का सवाल नहीं उठता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में आपराधिक जांच जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होने के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन भी है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने संबंधित एफआईआर को रद्द कर दिया। अदालत ने भदोही के पुलिस अधीक्षक और सुरियावां थाना प्रभारी पर संयुक्त रूप से 1,000 रुपये का हर्जाना लगाया। वहीं, महिला के पिता पर 5,000 रुपये का हर्जाना लगाया गया। कोर्ट ने संबंधित थाने की सामान्य डायरी में भी आपराधिक कार्यवाही समाप्त होने की प्रविष्टि दर्ज करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट का यह फैसला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि बालिग नागरिकों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने और अपनी इच्छा से विवाह करने का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे मामलों में, जब किसी अपराध का प्रथमदृष्टया आधार मौजूद न हो, पुलिस को वयस्क दंपति के निजी और वैवाहिक जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

उत्तर प्रदेश न्यूज़ हैड कृष्ण कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

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