साधारण किसान परिवार में रहकर हासिल की उच्च शिक्षा !
एक साधारण किसान परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने आईपीएस जैसी महान उपलब्धि प्राप्त कर सिद्ध किया कि कोई भी व्यक्ति अपने भविष्य का स्वयं निर्माता एवं नियंता हो सकता है । विपरीत परिस्थितियों में वह कभी विचलित नहीं हुए । परिस्थितियों का डटकर सामना कर अन्ततः उन्होंने वह मुकाम हासिल कर लिया जिसकी उन्होंने आकांक्षा की थी । उन्होंने अपनी उपलब्धियां से सिद्ध कर दिया कि छोटे-छोटे कदम मीलों का सफर तय करते हैं । हममें से बहुत से लोग अपने सपनों को नहीं जी पाते क्योंकि वे अपने डर को जीते हैं । इसके ठीक विपरीत आईपीएस नीरज कुमार जादौन ने डर पर विजय प्राप्त कर अपने सपनों को जिया है । अपने लिए स्वयं द्वारा निर्धारित किए गए लक्ष्यों को प्राप्त किया है । अलीगढ़ जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईपीएस नीरज कुमार जादौन वर्ष 2015 बैच के तेज तर्रार निर्भीकता, लगगनशीलता, दृढ़ता, कर्मठता एवं ईमानदारी के लिए चर्चित आईपीएस अधिकारी कहे जाते हैं ।जालौन के नौरेजपुर से शुरू किया सफलता का सफर !
मूलभूत सुविधाओं में काफी पिछड़े उत्तर प्रदेश की बीहड़ पट्टी से जुड़े जालौन जनपद के नौरेजपुर गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे नीरज कुमार जौदान ने इस गांव से ही अपनी सफलता का सफर शुरू किया । बताया गया है कि पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े नीरज परिवार के दुलारे थे और वह अपने परिवार से बेहद प्यार करते हैं । दिसंबर 2008 को गांव के जमीनी विवाद के कारण कुछ गुंडो ने उनके पिता की गोली मारकर हत्या कर दी थी । जिससे 26 वर्षीय नीरज कुमार जादौन का परिवार पूरी तरह से टूट गया था । 5 भाई-बहनों में सबसे बड़े नीरज कुमार जादौन उन दिनों अमेरिकी टेलीकॉम कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर पद पर कार्यरत थे । इंजीनियर नीरज जादौन ने अपने पिता को न्याय दिलाने के बहुत प्रयास किये लेकिन स्थानीय पुलिस से वैसा सहयोग नहीं मिला जैसी उन्हें उम्मीद थी । पुलिस के रवैये से बहुंत आहत हुए और उन्होंने आम तौर पर पीड़ित की मदद न करने वाले बिगड़ैल पुलिस कर्मियों को सुधारने व उन्हें जनता की मदद करने का सबक सिखाने के के साथ ही अपने 22 लाख पैकेज की उक्त नौकरी को छोड़कर अपने पिता के हत्यारे को कानून से दंडित करवाने के लिए उन्होंने आईपीएस बनने की ठान ली ।कानपुर से किया स्नातक व बीएयू से बीटेक !
न्यूज वेबसाइट निशंक न्यूज़ के अलीगढ़ मंडल प्रभारी हुई बाचतीच में वर्तमान में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने बताया कि जनपद कानपुर से स्नातक तक पढ़ाई करने के बाद नीरज कुमार जादौन ने साल 2005 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बीटेक किया । इंजीनियरिंग के बाद एक साल तक उन्होंने नोएडा की एक निजी कंपनी में कार्य किया । जिस समय उनके पिताजी की मौत हुई थी, उस दौरान वह बेंगलुरु में एक अमेरिकी टेलीकॉम कंपनी में 22 लाख रुपए तनख्वाह के पैकेज पर तैनात थे । पिता की हत्यारों को कानूनी रूप से दंडित कराने के लिए उन्होंने 22 लख रुपए की पैकेज वाली इस नौकरी को छोड़कर आईपीएस बनने के लिए सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करनी शुरू कर दी ।आईपीएस बनने के लिये छोड़ी अच्छी नौकरियां !
बातचीत में आईपीएस नीरज जादौन ने बताया कि वह साल 2011 से ही सिविल सर्विसेज की तैयारियों में जुट गए थे । 2011 में इंटरव्यू तक पहुंचे, फिर अगले साल उन्हें इंडियन पोस्ट एंड टेलीकम्युनिकेशन अकाउंट्स एंड फाइनेंस सर्विसेज में पोस्ट मिली लेकिन उन पर सिर्फ आईपीएस बनने का जुनून सवार था । सन् 2014 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में 140वां स्थान हासिल किया । उन्होंने बताया कि मुश्किल के दिनों में उनके दादाजी ही परिवार का सबसे बड़ा सहारा थे, लेकिन सिविल सर्विसेज परीक्षा पास करने के बाद साक्षात्कार देने की तिथि निश्चित होने से ठीक 25 दिन पहले उनके दादा जी का देहांत हो गया । पिता की हत्या एवं उनकी नौकरी छोड़ने के बाद से ही मेहनत – मजदूरी करते हुए दादा जी ही उनके पूरे परिवार का पालन पोषण कर रहे थे ।*महत्वपूर्ण सूचना* 📢
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